कोटा विवादों से सुर्खियां बटोरने वाले तहसीलदार पर कार्यवाही नही होने पर सोमवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन,,,वकीलों-जनप्रतिनिधियों,पत्रकार सहित पीड़ित पक्ष होंगे धरना-प्रदर्शन में शामिल।

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पूर्व में पत्रकारों सहित वकीलों से दुर्व्यवहार के मामले में 08-जनवरी को एसडीएम कोटा को मुख्यमंत्री के नाम से ज्ञापन सौंपा जा चुका है।

बिलासपुर – कोटा:-अक्सर विवादों में रहने वाले कोटा तहसीलदार जिनका विवादों से  रिश्ता लगातार बना हुआ है, विवादस्पद कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के खिलाफ अब कोटा प्रेस क्लब के  सदस्यों ने मोर्चा खोलते हुए सोमवार 19-अक्टूबर से एसडीएम कार्यालय कोटा के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के लिए शुक्रवार को एसडीएम कोटा आनंद रूप तिवारी को ज्ञापन सौंपा गया।

बतादेें कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता जो कि त्रिय स्तरीय नगरपंचायत चुनाव के निर्वाचन  अधिकारी के कार्य के समय से लेकर वर्तमान स्थिति में लगातार विवादों में बने हुए हैं, चाहे वो चुनाव के समय महिला अभ्यर्थी के खिलाफ अमर्यादित शब्दो का प्रयोग हो या फिर अपने अधीनस्थ मातहत महिला पटवारी या कर्मचारियों से दुर्व्यवहार का मामला हो, या फिर पत्रकारों-वकीलों-जनप्रतिनिधियों से दुर्व्यवहार का मामला हो या फिर वर्तमान में राजस्व से जुड़े मामले जमीन नामान्तरण, प्राकृतिक आपदाओं में पीड़ित पक्ष के लोगो को मिलने वाली राशि से तहसील कार्यालय के बाबू के माध्यम से 05 से 10 हजार रुपए की अवैध उगाही का मामला हो उसके अलावा राजस्व से जुड़े ऐसे कई मामले है, जिसमे पीड़ित सहित पीड़ित के पक्षकार जिसमे की अधिवक्ता भी शामिल हैं, लगातार कोटा तहसीलदार के द्वारा प्रताड़ित हो रहे, ताजा मामला कोटा विकासखंड के नगोई निवासी दिलहरण यादव का है जो कि पेशे से अधिवक्ता भी है, जिनके छोटे भाई के पुत्र की पानी मे डूबने के कारण मौत हो गई थी, जिसका की शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली 4 लाख रुपए की राशि जानी थी, जिसके लिए 14 अक्टुबर को अधिवक्ता दिलहरण यादव पानी मे डूबने से मृत बच्चे की मां के साथ शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली राशि के लिए तहसील कार्यालय पहुचे थे, पूरी प्रक्रिया निपटाने के बाद भी काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब राशि का चेक नही मिला तो तहसील कार्यालय के बाबू के पास पीड़ित ने पूछा तो तहसील कार्यालय के बाबू ने कोटा तहसीलदार का हवाला देते हुए कहा कि कमीशन की राशि के बगैर चेक नही दिये जाने की बात कही गई है, जिसके बाद पीड़ित परिवार के द्वारा पुलिस अधीक्षक बिलासपुर के नाम शिकायत पत्र का आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमे की वर्तमान कोटा तहसीलदार सहित कार्यालय में पदस्थ बाबू के ऊपर काफी गंभीर आरोप लगाया गया है।


कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के खिलाफ इस प्रकार के आरोप लगना कोई नई बात नही है, इससे पूर्व में भी कोटा नगर के सत्ताधारी दल सहित विपक्षी दलों के नेताओं व अन्य लोगो ने भी कोटा तहसीलदार के ऊपर जमीन नामान्तर, ऋण-पुस्तिका के नाम पर 05 से 10 हजार रुपए की तहसील कार्यालय के बाबू के माध्यम से अवैध उगाही करने की बात बताई गई थी, नाम नही छापने के शर्त पर सत्ताधारी दल के एक वरिष्ठ नेता ने यहा तक बताया कि जमीन नामत्रंण में कोटा तहसीलदार के द्वारा खुले तौर पर 10 हजार से 25 हजार तक कि मांग की जाती है, इससे पूर्व में भी निर्वाचन अधिकारी के रूप में अपनी भूमिका के दौरान कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के द्वारा आरक्षित सीटों के अस्थाई जाती प्रमाण पत्र जारी करने हेतु 5000₹ से लेकर ₹10000 तक अवैध रूप से वसूली की जाती थी देर रात तक तहसील कार्यालय खुला रहता है। कार्यालय के बाबू के माध्यम से अवैध उगाही अभी भी वर्तमान में भी जारी है।


वर्तमान कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के खिलाफ लगातार शिकायत का अंबार लगने के बावजूद भी अब तक उन पर किसी भी प्रकार की कोई भी कार्यवाही नहीं की गई इस बारे में एसडीएम कोटा आनंद रूप तिवारी से जब इसकी वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया गया तो एसडीएम कोटा के द्वारा मामले पर ज्यादा कुछ नहीं बोला गया बस इतना ही कहा गया है, सभी संबंधित मामले की सूचना जिला कलेक्टर बिलासपुर को अवगत करा दी गई है, कई बार तो ये समझ नही आता कि वर्तमान में कोटा ब्लॉक को एसडीएम कोटा चला रहे हैं, या फिर तहसीलदार कोटा कई बार तो एसडीएम कोटा के दिए आदेशों कि भी कोटा तहसीलदार के द्वारा अवमानना की जा चुकी है, फिलहाल अब इस पूरे मामले को लेकर कोटा तहसीलदार प्रमोद के खिलाफ पूरी तरह से मोर्चा खोलते हुए प्रेस क्लब कोटा के द्वारा धरना प्रदर्शन करने की जानकारी के बाद कोटा रतनपुर बेलगहना बार एसोसिएशन के सदस्यों सहित कोटा नगर के जनप्रतिनिधियों ने भी धरने को समर्थन देने के साथ साथ धरने में शामिल होने की बात कही।

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