संवाददाता -मनमोहन सिंह,

कोटा,खैरा– केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार प्रतिवर्ष वृक्ष के महत्व को समझाते हुए जागरूकता फैलाकर पौधारोपण करने लोगों को प्रेरित कर रही है। प्रशासन द्वारा नि:शुल्क पौधा वितरण पर वृक्षों के प्रति लगाव लाने की कल्पना भी अब सार्थक होते हुए नजर नहीं आ रही है। हरी पत्तियों के साथ सजी हुई घने जंगल वन विकास निगम की लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। जिस पर अंकुश लगाने में शासन-प्रशासन बेबस नजर आ रही है।
वन मंडल बिलासपुर की वन परिक्षेत्र रतनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत रिगवार क्षेत्र में आने वाली जंगल में पिछले कई दिनों से आसपास के ग्रामीणजन लगातार पेड़ों की कटाई करते हुए जंगल पर कब्जा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। परिसर रक्षक पचरा निवास गृह से महक 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खसरिया मार्ग से लगी हुई कक्ष क्रमांक 2530 की लगभग 10 एकड़ जंगलों की अवैध कटाई करते हुए लगभग 3 हजार से अधिक छोटे बड़े बेशकीमती सागौन ,सरई जैसे पेड़ों की बलि चढ़ा दिया गया है। काटी गई पेड़ों की जगह को खेत में तब्दील किया जा रहा है।वही पेड़ों की कटाई रोकने की वजह अनवरत जारी है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अतिक्रमणकारी वन विकास के प्रति कितने बेखौफ है। वन परीक्षा के रतनपुर अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों मनोरम जंगल अवैध कटाई से विलुप्त की कगार पर जा रही है।वन है तो कल है जंगलों का रहना मानवीय जीवन के साथ जंगलों में विचरण करने वाले वन्य प्राणियों के लिए भी अत्यंत आवश्यक है लगातार जंगलों का घटता रकबा चिंता का विषय बना हुआ है।वन विकास निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से बेशकीमती सागौन,नीलगिरी पेड़ों की अंधाधुन अवैध कटाई होने से मनोरम घना जंगल आज मैदान में तब्दील बता जा रहा है जिसे रोकने में नाकामयाब वन विकास निगम लगातार कटघरे में नजर आ रहा है।

बगैर कार्यवाही किये लौटी विभाग की कार्यशैली संदेहास्पद —-अवैध कटाई कर अतिक्रमण की सूचना उपरांत वन परिक्षेत्र रतनपुर से मामले की तब्दीश कर कार्यवाही करने टीम भेजी गई। अतिक्रमण स्थल पर पहुंच कर कटे हुए पेड़ों को नजरअंदाज करते हुए बगैर कार्यवाही किए वन विभाग कर्मचारी वापस लौट गए। ग्रामीणों को अवैध कटाई स्थल के बाहर मुख्य मार्ग में तैनात कर दिया गया ताकि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को जंगल जाने से रोक सके। ग्रामीणों ने बताया कि निरीक्षण करने आए अधिकारियों ने किसी भी व्यक्ति को अतिक्रमण स्थल पर जाकर फोटो खींचने से मना करने के लिए कहा गया है। अवैध कटाई मामला का निराकरण ग्रामीण आपस में करेंगे। विभाग द्वारा इस तरह के हथकंडे अपना उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।वन विभाग और विकास की पेंच में फंसा जंगल का भविष्य —— वातावरण को शुद्ध रखने, धूप से बचाकर छाया प्रदान करने के साथ वन्य जीवो को संरक्षण देने वाली जंगल का भविष्य दिन प्रतिदिन अंधकार की ओर बढ़ती जा रही है। हर वर्ष लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर शासन-प्रशासन पौधारोपण तो करवाती है,लेकिन उसे संरक्षित रखने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती है। बलि चढ़ती हुई पेड़ों की जानकारी होते हुए भी ना तो वन विभाग कार्यवाही करती हैं और ना ही वन विकास निगम के जिम्मेदार कर्मचारी अधिकारी। अवैध कटाई रोकने के खिलाफ लगातर विभाग बेबस नजर आ रहे हैं ।

नहीं संभल रहा विभाग से जंगल और जमीन —— अंचल में लगातार हो रही पेड़ों की अवैध कटाई को रोकने में वन विकास निगम कोसों दूर है। घने जंगलों के मध्य लगे बेशकीमती पेड़ों को संरक्षित रखना तो दूर मुख्य मार्ग मैं लगे सागौन ,सरई,नीलगिरि जैसे पेड़ों को बचाने में विफल साबित हो रही है। चारों ओर घने जंगल को मैदान मे परिवर्तित कर अवैध कब्जा का खेल जोरों पर चल रहा है। जंगलों की कटाई से शासन को राजस्व हानी तो हो रही है साथ ही साथ जब जमीन भी हाथ से निकलता जा रहा है। घटती हुई जंगल की रकबा से वह दिन दूर नहीं होगा कि जंगल केवल कागजों में ही दिखाई देगा।

अजय शर्मा प्रभारी डिप्टी रेंजर रतनपुर— खसरिया में अवैध कटाई कर अतिक्रमण की जानकारी है। टीम बनाकर घटनास्थल पर जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।

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