बिलासपुर जिले के बहुचर्चित अचानकमार टाइगर रिजर्व में एक और बाघ की मौत।

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ न्यायधानी की सबसे बहुचर्चित बिलासपुर जिले में स्थित अचानक मार टाइगर रिजर्व में बाघ हो या और अन्य प्राणीयो की मौत की सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर जिले के सबसे बड़ा बफर जोन अचानक मार में एक और बाघ की मौत हो गई है. जानकारी के मुताबिक बाघ की मौत की ख़बर कई दिनों के बाद वन विभाग को गुरुवार को मिली.अचानक मार वन विभाग के सूत्रों के अनुसार अचानकमार के कोर इलाके से लगे टिंगीपुर गांव के कंपार्टमेंट नंबर 94 में स्थित जंगल  में बाघ शावक के शव लग भग दो से तीन दिन पहले की बताई जा रही है।इसकी सूचना ग्रामीणों ने ,वन विभाग को दी जिसके बाद वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी वहां मौके पर पहुंचे हुए हैं।.

जानकारी के मुताबिक यह इलाका वन विकास निगम के अंतर्गत आता है.हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया था।  बाघ की मौत कैसे हुई लेकिन सूत्र से स्पष्ट हो गया है कि मौत बाघ की  ही हुई है । इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत  को जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा छिपाई जा रही है । आखिर क्यों नहीं छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा हर साल वन्य प्राणियों के रक्षा के लिए लाखों खर्च किया जाता है, लेकिन अधिकतर अधिकारियों द्वारा अचानक मार रिजर्व के नाम से सिर्फ सैकड़ों कैमरे लगाने के बाद भी इस तरह एटीआर से बाघ की मौत की खबर से अचानक मार रिजर्व में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ी सवाल खड़े हो रहे आखिर क्यों नहीं । सूत्रों की माने तो टाइगर रिजर्व के अधिकारियों द्वारा वहाँ पदस्थ बिट गार्ड के भरोसे छोड़ कर अधिकारी बिलासपुर स्थित व कोटा में स्थित ऑफिस में बैठकर इस खुशनुमा ठंड हो या गर्मी बस- AC,में बैठ कर  मजा ले रहे हैं अधिकारी। शासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल ऐसे अधिकारियों पर कार्यवाही करनी चाहिए, नही छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायधानी बिलासपुर जिले में स्थित अचानक मार टाईगर रिजर्व की दिन बदिन अस्तित्व को बड़ा नुकसान हो सकता है ।

  • अधिकारियों का नंबर कवरेज से बाहर,,,

इस पूरे मामले में खबर लिखे जाने तक जिम्मेदार अधिकारियों से सम्पर्क किया गया लेकिन उनका मोबाईल कवरेज से बाहर आ रहा है।

टिंगीपुर गांव से लगे हुए इलाके में वन्यप्राणियों के शिकार से जुड़े मामले पहले भी सामने आते रहे हैं.

2019 में इसी गांव में शिकार के लिए लगाए गए बिजली की तार की चपेट में एक बच्चा आ गया था.इसके बाद उस बच्चे के दोनों हाथ काटने पड़े थे.

खतरे में बाघ
छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार तक 46 बाघों के होने का दावा वन विभाग करता रहा है.

लेकिन राज्य में भूपेश बघेल की सरकार आने के बाद वन विभाग ने जो रिपोर्ट पेश की, उसके अनुसार राज्य में केवल 19 बाघ हैं.

19 बाघों की रिपोर्ट के बाद से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अब तक राज्य के 4 बाघों के खाल शिकारियों से बरामद किए जा चुके हैं.मतलब ये कि राज्य में अगर 19 बाघों के आंकड़ों पर भरोसा किया जाए तो इनमें से भी 4 बाघ कम हो गए.गुरुवार को एक और बाघ का शव मिलने के बाद कम हुए राज्य में बाघों की संख्या घट कर 14 रह जाने का अनुमान लगाई जा रही है.राज्य के तीन टाइगर रिजर्व- उदंती-सीतानदी, इंद्रावती और अचानकमार में बाघों को लेकर संशय रहे हैं.

लेकिन बाघों के कम होने की यही गति रही तो राज्य से बाघों का अस्तित्व ही ख़त्म हो जाएगा.

3 सालों में कहां-कहां मिली छत्तीसगढ़ के बाघों की खाल या शव
21 फ़रवरी 2019 डिंडौरी
8 दिसंबर 2019 कांकेर
24 जनवरी 2021 धमतरी
12 मार्च 2021 बस्तर
25 नवंबर 2021 मुंगेली।

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