बिलासपुर। राष्ट्रवादी युवा किसान संगठन के राष्ट्रीय सचिव के द्वारा बताया गया है कि कार्यकर्ताओं के द्वारा ज्यादा से ज्यादा प्रदेश भर मै वृक्षारोपण किया जायेगा आज के दौर में

सड़कों पर धुंआ तथा धूल उड़ाती हुई तेज गति से शोर करती दौड़ती गाड़ियां, औद्योगिक विकास के लिए दिन प्रति दिन स्थापित करखाने तेजगति से बढ़ती हुई जानसंख्या और उनके रहने के लिए तेजगति से बनते गगनचुंबी इमारत, इस प्रकार विकास की अंधी दौड़ जन साधारण का दृष्टिकोण ही बदल दिया है, शायद ही कोई पहाड़ पहाड़ी इत्यादि बचे हो जहां मनुष्य ने आवागमन के लिए सड़कें, रेल्वे लाइन न बना लिए हो. क्या इसी का नाम विकास. हमें सोचना होगा हम आज से 50 वर्ष पहले सुखी थे या आज.
आज सारा संसार विभिन्न प्रकार के पर्यावरणीय प्रदूषण से ग्रस्त हैं.
पर्यावरण के दूषित होने से मानव जाति के अस्तित्व को जो खतरा पैदा हो गया है वह अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है प्रकृति से छेड़छाड़ करने से विभिन्न प्रकार के प्रदूषण ने नई नई समस्याओं को जन्म दिया है जल. हवा. शोर. तथा भूमि प्रदूषण जैसे मानव जाति के अस्तित्व को धीरे धीरे समाप्त करने के लिए अपने बाहुपाश मैं कसते जा रहे हैं. हमारे जीवन के लिए जिन वस्तुओं की आवश्यकता है इन सभी वस्तुओं का स्त्रोत पेड पौधे हैं क्यूंकि पेड़ पौधे हमारे आस पास के वातावरण को सुरक्षित रखते हैं खाने के लिए फल सब्जियां, पहनाने के लिए कपड़े, मकान बनाने के लिए लकड़ी, रोगीयो के लिए दवाइयां सभी पेड़ पौधों से प्राप्त होती है. लेकिन उसके बाद भी पेड़ पौधों का सर्वनाश होता जा रहा है. पहाड़ों की पीठे नंगी होती जा रही है. धरती का हृदय फाड़ कर कोयला निकाला जा रहा है. नदियों से खनन कर नदियों को सुखा किया जा रहा है.
फलस्वरूप हमें बड़े पैमाने पर जमीन मेंन बंजरता. भूमि कटाव, तथा सूखा का सामना करना पड़ रहा है प्रत्येक वर्ष लगभग 2 हजार करोड़ मैट्रिक टन मिट्टी का कटाव हो रहा है. ईधन खत्म होता जा रहा है पर्यावरण बिगड़ता जा रहा है. आज हम सभी धुंआ धूल तथा हानिकारक गैसों से घिरे हुये हैं.

उचित गर्मी (ताप) जीव जंतुओ एवं पेड़ पोधों की वृद्धि व विकास के लिए आवश्यक हे लेकिन यही ताप यदि सीमा से कम या अधिक हो जाता है तो वह जीवो तथा पेड़ पोधों के लिए प्रत्यक्ष एव अप्रत्यक्ष रूप से हानिकारक होता है,
एक तरफ सिमटती हरियाली तथा दूसरी तरफ वायुमंडल में तेजगति से बढ़ती हानिकारक गैसों के कारण हमारा जीवन भारी खतरे में पड़ गया है क्यूंकि वायुमंडल मेंन अधिक मात्रा मेंन हानिकारक गैसों का जमा हो जाने से पृथ्वी अधिक गरम हो रही है तथा जलवायु मेंन भी बदलाव आ रहा है. दिनों दिन पृथ्वी गरम होने के संकेत मिल रहे हैं,
लेकिन विकास तो वही है जो सबको सुख सुविधा दें लेकिन ऐसा विकास किस काम का जो जीना भी मुश्किल कर दे, इस प्रदूषण को रोकने की बात तो दूर उसे दिन दूना रात चोगुना बढ़ाने मेंन लोग लगे हुए हैं बड़े बड़े समारोह, भाषण, तथा पुस्तको का विमोचन होता है लेकिन लोगों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पढ़ रहा है फलस्वरूप परिणाम भी कुछ नहीं निकल रहा है. प्रदूषण के नियंत्रण में पेड़ पौधों का अपना एक विशेष महत्व है लेकिन खुला खजाना देख लोग आर्थिक लाभ अर्जीत कर रहे हैं फलस्वरूप बन क्षेत्र सिकुड़ते जा रहे हैं वह भूल गया है कि बन एक सीमित खजाना है और वह प्रकृति नियम की अवहेलना कर रहा है.
आँचल मेंन पर्यावरण संरक्षण के नाम पर कई संगठन बन तो चुके हैं
लेकिन वह नाम के लिए है इन संगठनो द्वारा अभी तक क्या किया गया कुछ पता नहीं.
जो विकास हमने किया है उस विकास का आनंद कितने वर्षों तक मानव ले सकता है क्यूंकि एक दिन वातावरण मेंन इतना अधिक प्रदूषण बढ़ जाएगा कि मानव जीवन तथा सभी प्राणी समाप्ति की कगार पर होंगे और तब रह जावेगी खाली इमारतें धुंआ उगलते करखाने. आज हमने स्वयं अपने पैरों पर कुल्हाड़ी चलाई है आज आवश्यकता इस बात की है कि मनुष्य को व्यक्तिगत हतो की बजाए सामूहिक हितो को सोचकार ही कार्य करने होंगे भली भांति सोच विचार कर ही विकास करना होगा और धरती को हरा भरा बनाना होगा ताकि प्रदूषण से छुटकारा मिल सके इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने पर ध्यान देना होगा.राष्ट्रवादी युवा किसान संगठन के कार्यकर्ताओं के द्वारा हर जिले में अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएंगे

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here